परिचय(Introduction)
साम्यवाद (communism) केवल एक राजनीतिक सिद्धांत नहीं है, बल्कि यह एक सम्पूर्ण आर्थिक विचारधारा (economic ideology) है जो पूंजीवादी व्यवस्था को चुनौती देती है |
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इसके अनुसार, संसाधनों और उत्पादन के साधनों(भूमि, कारखाने, मशीनरी ) पर निजी नहीं, बल्कि सामूहिक अर्थात समुदाय या राज्य का स्वामित्व होना चाहिए| साम्यवाद का अंतिम लक्ष्य एक साम्यवादी समाज (communist society) की स्थापना करना है – जहाँ न तो को अमीर है , न कोई गरीब; न कोई शोषक, न कोई शोषित; और हर व्यक्ति “अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देता है और आवश्यकता के अनुसार प्राप्त करता हैं”|
यह विचारधारा 19वीं सदी में कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा दी गई थी | साम्यवाद शब्द लैटिन के ‘communis’ से बना है, जिसका अर्थ है ‘सामान्य’ या ‘सबके लिए’ | व्यावहारिक रूप में, साम्यवाद ने 20 वी सदी मे रूस, चीन, क्यूबा, वियतनाम और पूर्वी यूरोप के कई देशों को प्रभावित किया| आज भी चीन, क्यूबा , उत्तर कोरिया, वियतनाम और लाओस आधिकारिक तौर पर साम्यवादी राज्य है|
इस लेख मे हम साम्यवाद (communism), साम्यीकरण (communization),समाजवादी(socialist) व्यवस्था और साम्यवादी समाज की अवधारणा को विस्तार से समझेंगे| हम इसके एतिहासिक विकास, मुख्य प्रावधानों, फायदे-नुकसान, वर्तमान प्रासंगिकता और परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों को कवर करेंगे|
एतिहासिक पृष्ठभूमि
साम्यवाद के विचार का उद्गम प्राचीन काल में भी देखने को मिलता है- प्लेटों के ‘रिपब्लिक’ में सामूहिक संपत्ति का उल्लेख है | लेकिन आधुनिक साम्यवाद का जन्म 19वीं सदी के यूरोप मे हुआ, जब औद्योगिक क्रांति ने मजदूरों को भारी शोषण शुरू कर दिया था |
प्रमुख एतिहासिक मिल के पत्थर
| वर्ष | घटना | महत्व |
| 1848 | कम्युनिस्ट मेनीफेस्टो का प्रकाशन (मार्क्स-एंगेल्स) | साम्यवाद का वैज्ञानिक आधार |
| 1871 | पेरिस कम्यून | पहली मजदूर क्रांति का प्रयास |
| 1917 | रूसी क्रांति (अक्टूबर क्रांति ) | लेनिन के नेतृत्व मे विश्व का पहला साम्यवादी राज्य-सोवियत संघ |
| 1949 | चीनी क्रांति | माओत्से तुंग ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की |
| 1959 | क्यूबा क्रांति | फिदेल कास्त्रो ने साम्यवादी शासन लागू किया |
| 1991 | सोवियत संघ का विघटन | शीत युद्ध की समाप्ति और वैश्विक साम्यवाद को झटका |
साम्यवाद का विकासक्रम
- आदिम साम्यवाद (Primitive Communism): मार्क्स के अनुसार, आदिम समाजों में संसाधन सामूहिक थे |
- यूटोपियन साम्यवाद: रॉबर्ट ओवन, सेंट-साइमन जैसे विचारको ने आदर्श समाज की कल्पना की |
- वैज्ञानिक साम्यवाद: मार्क्स और एंगेल्स ने एतिहासिक भौतिकवाद और वर्ग संघर्ष के सिद्धांत दिए |
- लेनिनवाद और स्टलीनवाद: रूस में व्यावहारिक क्रांति और केन्द्रीकृत योजना|
- माओवाद: चीन में किसानों पर आधारित क्रांति और सांस्कृतिक क्रांति|
प्रमुख बिन्दु
साम्यवाद के सैद्धांतिक ढांचे को समझने के लिए इसके प्रमुख स्तंभों का अध्ययन आवश्यक हैं :
1. निजी संपत्ति का उन्मूलन (Abolition of Private Property)
साम्यवाद मे निजी संपत्ति को शोषण का मूल कारण माना जाता है | सभी उत्पादन के साध-ज़मीन कारखाने, बैंक, परिवहन-सार्वजनिक या सामूहिक होंगे |
2. साम्यीकरण(Communization) की प्रक्रिया
साम्यीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा निजी संपत्ति और उत्पादन के साधनों को क्रमशः सामूहिक स्वामित्व मे लिया जाता है| यह साम्यवाद की स्थापना का अनिवार्य चरण है | इसमे भूमि सुधार , उद्धोग का राष्ट्रीयकरण, और सहकारी समितियों का गठन शामिल है |
3. वर्गहीन समाज (Classless Society)
साम्यवादी समाज में कोई वर्ग नहीं होगा—न पूंजीपति (बुर्जुआ),न मजदूर (प्रोलेटेरियत)।सभी नागरिक समान अधिकार और अवसर प्राप्त करेंगे|
4. उत्पादन के साधनों पर सामूहिक स्वामित्व
यह समाजवादी(socialist) और साम्यवादी व्यवस्था का मूल है| राज्य( जनता का प्रतिनिधि ) सभी प्रमुख उद्योगों और संसाधनों का प्रबंधन करता है|
5. केन्द्रीय नियोजन (central Planning)
बाजार की अदृश्य शक्तियों के बजाय, एक केन्द्रीय योजना आयोग यह तय करता है-क्या उत्पादन होगा, कितना होगा, किस कीमत पर बिकेगा| उदाहरण: सोवियत संघ की पंचवर्षीय योजनाएं |
6. प्रत्येक को उसकी अवशयकता के अनुसार
यह साम्यवाद का आदर्श वाक्य है | उच्च अवस्था में, लोग अपनी क्षमता से योगदान देंगे और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार प्राप्त करेंगे – बिना मुद्रा के लेन-देन की कल्पना की गई है |
7. अंतर्राष्ट्रीयता (Internationalism)
साम्यवाद सीमाओं को नहीं मानता। मार्क्स और एंगेल्स ने लिखा था;
“Working men of all countries, unite”
यानि सारे देशों के मजदूरों, एक हो जाओ|
साम्यवाद और संजवाद की तुलना
| पैरामीटर | समाजवाद (Socialist) | साम्यवाद (Communism) |
| अवस्था | संक्रमणकालीन (मार्क्स के अनुसार ) | अंतिम, आदर्श अवस्था |
| स्वामित्व | राज्य का स्वामित्व प्रमुख | पूर्ण सामूहिक/समुदाय का स्वामित्व |
| निजी संपत्ति | सीमित रूप से अनुमत (छोटे पैमाने पर ) | पूर्णतः समाप्त |
| मुद्रा | मौजूद होती है | समाप्त (कल्पित ) |
| राज्य की भूमिका | मजबूत, सक्रिय | विलुप्त हो जाता है (वर्गहीन समाज में) |
| आदर्श वाक्य | “प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार “ | “प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार” |
साम्यवाद से लाभ
- आर्थिक समानता: अमीर-गरीब की खाई पूरी तरह समाप्त होती है| सभी बुनियादी सुविधाएं समान रूप से मिलती हैं |
- शोषण का अंत: मजदूरों से अतिरिक्त मूल्य (surplus value) नहीं चुराया जाता |
- मुफ़्त शिक्षा और स्वास्थ्य: क्यूबा और सोवियत संघ के उदाहरण देखें – साक्षरता दर और जीवन प्रत्याशा मे भारी सुधार |
- तेजी से औद्योगिकरण: सोवियत संघ ने 1930 के दशक में बहुत समय में एक कृषि प्रधान देश से औद्योगिक महाशक्ति बनने की छलांग लगाई |
- बेरोजगारी की समस्या नहीं: केन्द्रीय योजना में प्रत्येक नागरिक को काम दिया जाता है |
- आवास, भोजन, वस्त्र की गारंटी : मूलभूत आवश्यकताओ का अधिकार |
साम्यवाद से हानी
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन: बोलने, लिखने, व्यवसाय चुनने और देश छोड़ने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध | उदाहरण – सोवियत संघ में प्रचार मंत्रालय (Gekkonidae) और KGB की निगरानी।
- आर्थिक अक्षमता: प्रतिस्पर्धा और लाभ के अभाव मे नवाचार (innovation) मर जाता है | कालाबाजारी और भ्रष्टाचार बढ़ता है |
- भीषण अकाल और मानवीय त्रासदियाँ:
- सोवियत संघ (1932-33)- होलोडोमोर (यूक्रेन मे 3-4 मिलियन मौतें )|
- चीन (1958-62)-ग्रेट लीप फॉरवर्ड के दौरान 15-30 मिलियन अकाल मौतें |
- तानाशाही की प्रवृति: एकदलीय शासन, विपक्ष का दमन | स्टालिन के ‘ग्रेट पर्ज’ (1936-38)में लाखों लोग मारे गए |
- प्रोत्साहन की कमी: अधिक मेहनत करने का कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं, इसलिए श्रमिकों की उत्पादकता कम होती है |
- पर्यावरणीय क्षति: तेज औद्योगीकरण के चक्कर में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी (जैसे चीन में वायु प्रदूषण, सोवियत संघ में अरल सागर त्रासदी)।
वर्तमान प्रासंगिकता /केस स्टडीज
आज विश्व में शुद्ध साम्यवादी अर्थव्यवस्था बहुत कम बची है| फिर भी, साम्यवादी विचारधारा के व्यवहारिक स्वपरूप निम्नलिखत देशों में देखे जा सकते हैं:
चीन-साम्यवाद का व्यावहारिक चेहरा
चीन ने 1978 के बाद से ‘समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था’ अपनाई है | राजनीतिक रूप से कम्युनिस्ट पार्टी का एकाधिकार बरकरार है, लेकिन आर्थिक रूप से निजी उड्डम, विदेशी निवेश और स्टॉक मार्केट को अनुमति है |
- सफलताएं: 800 मिलियन से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए | विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है |
- आलोचनाएं: राजनीतिक दमन, तिब्बत-शीनजियांग मानवाधिकार मुद्दे, सोशल क्रेडिट सिस्टम |
CU क्यूबा-स्वास्थ्य एवं शिक्षा का मॉडल
अमेरिका प्रतिबंधों के बावजूद, क्यूबा में साक्षरता दर 99.8% (विश्व मे शीर्ष) और शिशु मुत्यु दर कनाडा से भी कम है | स्वास्थ्य सेवा मुफ़्त और गुणवत्तापूर्ण है |
- कमजोरियाँ : प्रति व्यक्ति आय कम (~$9,000 PPP), माल की कमी, प्रवासन पर प्रतिबंध |
KP उत्तर कोरिया-चरम साम्यवाद
जूचे (आत्मनिर्भरता) सिद्धांत पर आधारित दुनिया का सबसे बंद और सैन्यीकृत साम्यवाद राज्य |
- वास्तविकता: गंभीर खाद्य संकट (1990 के दशक में ‘अर्दुरी मार्च’), संविधान में साम्यवाद को 2009 में हटाकर ‘किम इल-सुनगवाद’ लिखा गया | उत्तर कोरिया को अब कई विशेषज्ञ ‘सम्यवादी नहीं, बल्कि राजवंशीय तानाशाही’ मानते हैं |
IN भारत-साम्यवादी प्रभाव
भारत मे केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में वामपंथी दल (CPI, CPM) सत्ता में रहे हैं | केरल मॉडल उच्च साक्षरता, कम शिशु मुत्यु दर और भूमि सुधारों के लिए जाना जाता है |
नक्सलवाद: यह माओवादी साम्यीकरण(communization) का एक सशस्त्र प्रयास है, जो 10 राज्यों के आदिवासी इलाकों में सक्रिय है | भारत सरकार इसे सबसे बड़ा आंतरिक सुरक्षा खतरा मानती है|
वैश्विक पुनरुत्थान?
कोविड-19 महामारी के बाद, पूंजीवादी देशों मे भी सार्वजनिक स्वास्थ्य, मुफ़्त शिक्षा और आय असमानता पर बहस तेज़ हुई है | कई युवा ‘साम्यवादी विचारों’ जैसे सार्वभौमिक बुनियादी आए (UBI) और सहकारी उद्धोगों मे रुचि ले रहे हैं |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या साम्यवाद और मार्क्सवाद एक ही हैं?
उत्तर:नहीं। मार्क्सवाद-साम्यवाद का वैज्ञानिक सिद्धांत है। साम्यवाद एक व्यापक आंदोलन, विचारधारा और लक्ष्य है। मार्क्सवाद मार्क्स और एंगेल्स के विचारों का समूह है, जबकि साम्यवाद उस सिद्धांत का व्यावहारिक क्रियान्वयन है (जैसे लेनिनवाद, माओवाद)।
साम्यवादी समाज (Communist society) में कोई सरकार नहीं होगी?
उत्तर:मार्क्स के अनुसार, साम्यवाद के उच्च चरण में राज्य (जो शोषण का उपकरण है) ‘मुरझा’ कर समाप्त हो जाएगा। लेकिन व्यवहार में किसी भी साम्यवादी देश ने यह अवस्था प्राप्त नहीं की है; बल्कि राज्य और भी मजबूत हुआ है।
communization (साम्यीकरण) की प्रक्रिया मे क्या-क्या शामिल हैं ?
उत्तर: साम्यीकरण में तीन मुख्य चरण होते हैं – (1) भूमि और उद्योगों का राष्ट्रीयकरण, (2) सहकारी समितियों का गठन, (3) मुद्रा और बाजार प्रणाली को समाप्त कर वस्तु विनिमय प्रणाली की ओर बढ़ना। व्यवहार में यह प्रक्रिया बहुत कठिन और अक्सर हिंसक रही है।
क्या साम्यवाद और उदार लोकतंत्र में सामंजस्य संभव है ?
उत्तर: अधिकांश विद्वानों के अनुसार, नहीं। साम्यवाद एकदलीय शासन और केंद्रीय योजना पर जोर देता है, जबकि उदार लोकतंत्र बहुदलीय प्रणाली, निजी संपत्ति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर। हालाँकि, कुछ ‘यूरो-कम्युनिस्ट’ दलों (जैसे इटली, फ्रांस) ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लिया, लेकिन उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली।
निष्कर्ष
साम्यवाद एक प्रभावशाली आर्थिक विचारधारा (economic ideology) है जिसने विश्व इतिहास को गहराई से आकार दिया | इसने शोषण, वर्गविभाजन और औपनिवेशिक उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाई |लेकिन व्यवहार में, किसी भी देश ने आदर्श साम्यवादी समाज (communist society) की स्थापना नहीं की। सोवियत संघ विघटित हो गया; चीन ने मिश्रित अर्थव्यवस्था अपना ली; क्यूबा आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। फिर भी, साम्यवाद के कुछ तत्व – सार्वजनिक स्वास्थ्य, मुफ्त शिक्षा, भूमि सुधार, मजदूरों के अधिकार – आधुनिक लोकतंत्रों में भी सराहे जाते हैं।