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सूचना का अधिकार अधिनियम: RTI ACT 2005

RTI Act 2005

परिचय :

15 जून 2005 को यह कानून पास किया गया और 12 अक्टूबर 2005 से पूरी तरह लागू हो गया | इसे सूचना का अधिकार (RTI) कहा जाता है | इसका मतलब है की हर नागरिक सरकार से जानकारी मांगने का अधिकार है | इस कानून के जरिए सरकार अपने काम और व्यवस्था को जनता के सामने पारदर्शी बनती है |

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RTI Act क्या है ?

सूचना का अधिकार (RTI) का मतलब है की हर नागरिक को जानकारी पाने का हक हो | यह अधिकार सरकार अपने नागरिकों को देता है | इस कानून के जरिए सरकार अपने कम और पूरी व्यवस्था को जनता के सामने खुला और प्रदर्शी बनती है |

RTI Act 2005 , सूचना का अधिकार अधिनियम

इतिहास 

अंग्रेज ने भारत पर करीब 250 साल राज किया | इस दौरान उन्होंने शासकीय गोपनीयता अधिनियम 1923 बनाया , जिससे सरकार को यह अधिकार मिल गया की वह किसी भी जानकारी को गुप्त रख सकती है |

1947 मे आजादी मिलने के बाद 1950 मे संविधान लागू हुआ लेकिन इसमे सूचना के अधिकार के बारे मे कुछ नहीं  कहा गया | साथ ही अंग्रेजो का बनाया हुआ यह गोपिणीयता कानून भी नहीं बदला गया | इसलिए सरकारे इसी कानून का इस्तेमाल करके जनता से कई जरूरी जानकारी छुपती रही |

सूचना का अधिकार की शुरुआत 1975 मे एक अहम केस “ राज नारायण बनाम उत्तर प्रदेश सरकार “ से मानी जाती है | इस मामले मे सुप्रीम कोर्ट ने कहा की जनता को सरकारी कामों की जानकारी मिलनी चाहिए | इस फैसले से अभियक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) के दायरे मे सूचना का अधिकार भी शामिल हो गया |

1982 मे प्रेस आयोग ने कहा की गोपनीयता कानून की धार 5 को हटाया जाना चाहिए, क्योंकि इसमे यह साफ नहीं था की कौन सी जानकारी गुप्त है और कौन सी नहीं | इससे सरकार अपनी मर्जी से जानकारी छुपा सकती थी | बाद मे 2006 मे एक प्रशसनिक आयोग (विरप्पा मोइली की अध्यक्षता मे ) ने भी इस पुराने कानून को खतम करने की सिफारिश की | सूचना के अधिकार की असली मांग राजस्थान से शुरू हुई | 1990 के दशक मे मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) और अरुणा राय के नेतृत्व मे लोगों ने आंदोलन किया और जनसुनवाई के जरिए भ्रष्टाचार को उज्जागर किया |

1989 मे वी पी सिंह की सरकार ने RTI कानून बनाने का वादा किया, लेकिन उनकी सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई , इसलिए यह कानून लागू नहीं हो सका |

1997 में एक कमेटी (एच.डी. शौरी की अध्यक्षता में) ने RTI का ड्राफ्ट तैयार किया लेकिन सरकारों ने इसे लागू नहीं किया | इसके बाद 2002 मे संसद ने सूचना की स्वतंत्रता विधेयक पास किया और 2003 मे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई , लेकिन नियम बनने के कारण यह कानून लागू नहीं हो पाया | 

यानि RTI Act बनने से पहले कई सालों तक कोशिशें होती रही, लेकिन इसे लागू करने मे काफी समय लगा |

1. लोकतंत्र और पारदर्शिता मे इसकी भूमिका 

  • लोकतंत्र का आधार है जवाबदेही और पारदर्शिता 
  • RTI Act नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने और जवाब मांगने का अधिकार देता है |
  • इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगती है और जनता को शासन मे भागीदारी का अवसर मिलता है |
  • यह अधिनियम सरकार और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करता है |

अधिनियम का उद्देश्य 

  • नागरिकों को सशक्त बनाना ताकि वे शासन मे सक्रिय भागीदारी कर सकें |
  • सरकारी कामकाज को पारदर्शिता और जवाबदेही बनाना |
  • भ्रष्टाचार और मनमानी को कम करना |
  • लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना | 

2. अधिनियम की प्रमुख धराए

धारा 3 – नागरिकों का सूचना का अधिकार 

  • यह धारा कहती है की हर भारतीय नागरिक को सूचना प्राप्त करने का अधिकार है |
  • यानि कोई भी व्यक्ति सरकारी विभागों से उनके कामकाज, निर्णय , खर्च आदि की जानकारी मांग सकता है |

धारा 4 – लोक प्राधिकरणों की  बाध्यताएं

  • सरकारी संस्थानों को अपने कामकाज से जुड़ी जानकारी स्वत: प्रकाशित करनी होती है |
  • जैसे: संगठन की संरचना, कार्यप्रणाली, बजट , निर्णय लेने की प्रक्रिया आदि |
  • इसका उद्देश्य है की नागरिकों को बिना आवेदन किए ही अवशयक जानकारी मिल सके |

धारा 5 – लोक सूचना अधिकारियों की नियुक्ति 

  • हर सरकारी विभाग मे public Information Officer (PIO) नियुक्त किया जाता है |
  • PIO की जिम्मेदारी होती है की वह नागरिकों के समय पर और सही सूचना उपलब्ध कराए |

धारा 6-7 सूचना प्राप्ति की प्रक्रिया और समयसीमा 

  • नागरिक लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आवेदन कर सकते है |
  • PIO को 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध करानी होती है |
  • यदि सूचना जीवन और स्वतंत्र से जुड़ी हो तो 48 घंटे मे देनी होती है |

धारा 8-9 – सूचना देने से छूट और अस्वीकृति के आधार 

कुछ सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की जा सकती ,जैसे:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी 
  • गोपनीय अंतरराष्ट्रीय संबंध
  • व्यक्तिगत गोपिनीयता 

यदि सूचना देने से किसी तीसरे पक्ष के अधिकार प्रभावित होते है तो उसे अस्वीकार किया जा सकता है |

3. सूचना आयोगों की संरचना

केन्द्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission)

  • गठन : केंद्र सरकार द्वारा स्थापित, इसका मुख्यालय दिल्ली मे है |
  • संरचना: इसमे एक मुख्य सूचना (Chief Information Commissioner) और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त (Information Commissioners) होते हैं |

शक्तियां

  • अपील सुनना और निर्णय देना |
  • लोक सूचना अधिकारियों को निर्देश देना |
  • सूचना न देने पर दंड लगाना |

पदावधि : आयुक्तों का कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है (जो पहले हो )|

RTI Act 2005 , सूचना का अधिकार अधिनियम

राज्य सूचना आयोग (State Information Commission)

  • गठन : प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा स्थापित |
  • संरचना : इसमे एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 राज्य सूचना आयुक्त होते है |

शक्तियां 

  • राज्य स्तर पर अपील सुनना |
  • राज्य के लोक सूचना अधिकारियों को निर्देश देना |
  • सूचना न देने पर दंड लगाना |

पदावधि : कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक |

मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य आयुक्तों की भूमिका

  •  मुख्य सूचना आयुक्त : आयोग का प्रमुख जो सभी मामलों की निगरानी करता है और आयोग की कार्यवाही का नेतृत्व करता है |
  • अन्य आयुक्त अपीलों और शिकायतों की सुनवाई मे सहयोग करते है |

भूमिका

  • नागरिकों को समय पर सूचना दिलवाना |
  • पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना |
  • सूचना न देने वाले अधिकारियों पर कारवाई करना |

4. अपील और दंड प्रावधान 

प्रथम और द्वितीय अपील की प्रक्रिया 

प्रथम अपील

  • यदि किसी नागरिक को निर्धारित समय मे सूचना नहीं मिलती या असंतोषजनक उत्तर मिलता है, तो वह प्रथम अपील कर सकता है |
  • यह अपील संबंधित विभाग के उच्च अधिकारी First Appellate Authority) के पास की जाती है |
  • समयसीमा: आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर निर्णय देना होता है |

द्वितीय अपील

  • यदि प्रथम अपील से भी संतोषजनक उत्तर न मिले तो नागरिक द्वितीय अपील कर सकता है|
  • यह अपील केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग के पास की जाती है|
  • आयोग को 90 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होता है| 

सूचना आयोग की शक्तियां 

  • लोक सूचना अधिकारियों को निर्देश देने का अधिकार|
  • सूचना न देने पर दंड लगाने का अधिकार|
  • अपील और शिकायतों की सुनवाई करना 
  • जरूरत होने पर जांच करना और आदेश जारी करना|
  • नागरिकों को सूचना दिलवाने के लिए बाध्यकारी आदेश देना|

दंडात्मक प्रावधान (धारा 20)

यदि लोक सूचना अधिकारी:

  • समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराता,
  • गलत / भ्रामक सूचना देता है,
  • या बिना उचित कारण सूचना देने से इनकार करता है, तो उस पर दंड लगाया जा सकता है|

दंड की राशि :

  • 250 प्रति दिन की दर से , अधिकतम 25,000 तक |
  • आयोग अधिकारी को कारण बताने का अवसर देता है , और यदि कारण असंतोषजनक हो तो दंड लागू होता है |
RTI Act 2005


5. अधिनियम की सीमाएं और चुनौतियां

Challenges (चुनौतियां)Solutions (समाधान)
गोपिणीयता बनाम पारदर्शिता का संतुलन – कुछ सूचनाएं राष्ट्रीयए सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध और व्ययक्तिगत गोपिणीयता से जुड़ी होती है जिन्हे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता |स्पष्ट दिशा-निर्देश और SOP(Standing Operating Procedure ) बनाना ताकि यह तय हो सके की कौन सी जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है और कौन से गोपनीय रखनी होगी |
सूचना तक पहुंच मे व्यावहारिक कठिनईयां – रिकार्ड व्यवस्थित न होना, ग्रामीण क्षेत्रों मे आवेदन प्रक्रिया जटिल होना, तकनीकी संसाधनों की कमी |डिजिटल रिकार्ड- कीपिंग को बढ़ावा देना , अनलाइन RTI पोर्टल्स को सरल बनाना , और ग्रामीण क्षेत्रों मे प्रशिक्षण/ सहायता केंद्र स्थापित करना |
संसाधनों और जागरूकता की कमी – नागरिकों और अधिकारियों दोनों मे RTI Act की जानकारी का अभाव , आयोगों मे स्टाफ और संसाधनों की कमी |जन-जागरूकता अभियान चलाना, अधिकारियों को नियमित प्रशिक्षण देना , और सूचना आयोगों मे पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध कराना |

6. RTI का महत्व और प्रभाव

भ्रष्टाचार रोकने में योगदान

RTI Act से सरकारी कामकाज छुपा नहीं रह पाता | जब कोई भी नागरिक जानकारी मांग सकता है , तो अधिकारियों पर दवाब रहता है की वे सही ईमानदारी से काम करें | इससे घोटाले, रिश्वत और गलत फैसलों पर रोक लगाने मे मदद मिलती है |

 नागरिक सशक्तिकरण (Empowerment)

RTI आम लोगों को ताकत देता है | पहले जो जानकारी सिर्फ अधिकारियों तक सीमित रहती थी , अब हर व्यक्ति उसे मांग सकता है | इससे लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं और जरूरत पड़ने पर सरकार से सवाल भी पूछ सकते है |

शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता

RTI से सरकार को अपने फैसले और काम का हिसाब देना पड़ता है | इससे शासन पारदर्शी (transparent) बनता है और जनता का भरोसा बढ़ता है | जब सरकार खुलकर काम करती है , तो गलतियां कम होती है और प्रशासन ज्यादा जिम्मेदार बनता  है |

अन्य देशों से तुलना 

देश कानून /वर्ष विशेषताएं भारत से तुलना 
स्वीडन Freedom of the Press Act (1766)दुनीया का पहला RTI कानून ; प्रेस और नागरिकों को सरकारी दस्तावेज तक पहुंच|भारत ने बहुत बाद मे (2005) RTI लागू किया , लेकिन नागरिकों को सीधे आवेदन करने का अधिकार दिया |
अमेरिका Freedom of Information Act (FOIA, 1966)संघीय जेंसियों  से सूचना मांगने का अधिकार; राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीयता पर छूट |भारत का RTI अधिक व्यापक है ; समयसीमा तय (30 दिन ) और दंडात्मक प्रावधान भी शामिल |
यूनाइटेड किंगडम Freedom of Information Act (2000)सरकारी दफ्तरों से जानकारी मांगने का हक है , और अगर जानकारी ना मिले तो अपील करने की व्यवस्था है |भारत मे अपील और दंड दोनों अधिक सख्त है |
ऑस्ट्रेलिया Freedom of Information Act (1982)नागरिकों को सरकारी दस्तावेज तक पहुंच; गोपनीयता और सुरक्षा पर छूट |भारत का RTI अधिक partticipatory है,ग्रामीण नागरिक भी आसानी से आवेदन कर सकते है |
RTI Act (2007)संविधान मे सूचना का अधिकार; नागरिकों को सरकारी कामकाज जानने का अधिकार |भारत और नेपाल दोनों मे RTI लोकतंत्र को मजबूत करने का औजार है |

निष्कर्ष 

भारत का RTI Act 2005 वैश्विक स्तर पर सबसे सशक्त और नागरिक-केंद्रित कानूनों मे से एक है | अन्य देशों ने पारदर्शिता के लिए कानून बनाए, लेकिन भारत ने इसे भ्रष्टाचार रोकने और नागरिक सशक्तिकरण का औजार बना दिया| 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

कोई भी भारतीय नागरिक RTI आवेदन कर सकता है |

समान्यतः 10 रुपये  आवेदन शुल्क होता है | (कुछ राज्यों मे अलग-अलग नियम हो सकते है )|

लिखित या अनलाइन आवेदन देकर, संबंधित विभाग के public Information officer (PIO) को भेज सकता है |

राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध, व्यक्तिगत गोपनीयता और कुछ गोपनीय दस्तावेज RTI से बाहर रखे गये है |

धारा 20 के तहत उस पर ₹250 प्रति दिन(अधिकतम ₹25,000) का जुर्माना लगाया जा सकता है |








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