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यूरोप मे राष्ट्रवाद

Nationalism in Europe

नमस्ते दोस्तों! क्या आपने कभी सोचा है कि आज हम जिस यूरोप को देखते है-फ़्रांस,जर्मनी,इटली जैसे सुंदर और संगठित देश-वे हमेशा से ऐसे नहीं थे? 18वी सदी तक यूरोप ‘पैचवर्क की तरह था, जहाँ छोटे-छोटे राज्य, रजवाड़े और कबीले हुआ करते थे | आज हम उस जादुई शब्द ‘राष्ट्रवाद’(Nationalism)की बात करेंगे, जिसमे अपनी धमक से बड़े-बड़े साम्राज्यों की चूलें हिला दी |

Table of Contents

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यह लेख न केवल आपको इतिहस की गलियों मे ले जाएगी, बल्कि आपको यह भी बताएगी की 2025 मे यूरोप के देशों मे फिर से यह राष्ट्रवादी लहर क्यों उठ रही है | क्या सच में  इतिहास खुद को दोहरा रहा है? चलिए रोमांचक सफर पर चलते हैं !

सोरय्यु का सपना और राष्ट्रवाद की पहली किरण

बात शुरू होती है 1848 की, जब एक फ़्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सोरय्यु ने चार चित्रों की एक शृंखला बनाई | उसने एक ऐसी दुनिया का ‘यूटोपियन’ (आदर्शवादी) विजन पेश किया, जहाँ दुनिया के सभी लोग अपनी राष्ट्रीय पोशाक और झंडों के साथ स्वतंत्रता की देवी के सामने कतारबद्ध होकर चल रहे हैं |

राष्ट्र-राज्य की अवधारणा: साझा पहचान का मनोविज्ञान 

सोरय्यु  की कल्पना मे राष्ट्र-राज्य का मतलब केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं था, बल्कि एक ऐसी जगह थी जहाँ नागरिकों को साझा इतिहास, विरासत और गौरव का भाव हो | जैसे कहते हैं न ,”दूध का जला छाछ फूँक-फूँक कर पीता है ,” ठीक वैसे ही यूरोप के लोगों ने सदियों की निरंकुश राजशाही और युद्धों के बाद अपनी एक अलग पहचान बनाने का संकल्प लिया | राष्ट्रवाद एक ऐसी ‘सामाजिक पूंजी बन गया, जिसमे अतीत के सामने गौरव और वर्तमान की सम्मान इच्छा समाहित थी |

फ़्रांसीसी क्रांति: जहाँ से ‘नागरिक’ का जन्म हुआ

1789 की फ़्रांसीसी क्रांति राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभियक्ति थी | जिसमे पहले लोग राजा के ‘प्रजा’ थे, लेकिन इस क्रांति ने उन्हे ‘नागरिक’(Citizen) बना दिया | क्रांति ने घोषणा की कि अब शक्ति किसी एक राजा के पास नहीं,बल्कि फ़्रांसीसी नागरिकों के समूह के पास होगी |

सामूहिक पहचान बनाने के क्रांतिकारी उपाय 

क्रांतिकारियो ने ‘ला पात्रीएं’ (पितृभूमि) और ‘ले सितोयन’(नागरिक ) जैसे शब्दों को हवा दी, ताकि लोगों को लगे की यह देश उनका हैं | उन्होंने पुराने शाही झंडे को हटाकर एक नया तिरंगा (Tricolour) अपनाया | स्टेट्स जनरल का चुनाव अब नागरिकों द्वारा किया जाने लगा और उसका नाम बदलकर ‘नेशनल असेंबली’ कर दिया गया |

क्षेत्रीय बोलियों का दमन और फ़्रांसीसी भाषा का उत्थान 

एक देश को जोड़ने के लिए एक भाषा की जरूरत होती है | इसलिए, क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया और पेरिस में बोली जाने वाली फ़्रांसीसी को राष्ट्र को आम भाषा बनाया गया | यह “उँट के मुँह मे जीरा” जैसा कोई छोटा बदलाव नहीं था, बल्कि एक सांस्कृतिक क्रांति थी जिसने करोड़ों लोगों को एक सूत्र मे पिरो दिया |

Nationalism in Europe

नेपोलियन का युग : सुधार और सम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा 

नेपोलियन  बोनापार्ट ने भले ही फ़्रांस में लोकतंत्र को खत्म कर दिया हो, लेकिन प्रशासनिक क्षेत्र में उसने जो किया, वह आज भी आधुनिक शासन की नींव माना जाता है | उसने 1804 की नागरिक संहिता (Napoleonic Code) लागू की |

1804 की नागरिक संहिता: समानता का नया मापदंड 

इस कानून के जन्म के आधार पर मिलने वाले सभी विषेधिकारों को खत्म कर दिया | उसने सामंती व्यवस्था को समाप्त किया और किसानों को भू-दासत्व से मुक्ति दिलाई | लेकिन “हर सिक्के के दो पहलू होते हैं | “जहाँ एक तरफ ये सुधार अच्छे थे , वही दूसरी तरफ नेपोलियन न जिन क्षेत्रों को जीता,वहाँ के लोगों पर भारी कर लगाए और जबरन सेना में भर्ती शुरू कर दी, जिससे राष्ट्रवाद की भावना उसके खिलाफ भी भड़कने लगी |

यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण:कुलीन वर्ग बनाम मध्यम वर्ग 

18वी सदी के मध्य मे यूरोप का समाज दो हिस्सों मे बँटा था | एक तरफ मुट्ठी भर कुलीन वर्ग था जिनके पास सारी जमीन और सत्ता थी, और दूसरी तरह ‘पेजेंट्री’ यानी किसान वर्ग था । लेकिन औद्योगिक क्रांति ने एक नए ‘मध्यम वर्ग’ को जन्म दिया—व्यापारी, उद्योगपति और पेशेवर लोग |

उदारवादी राष्ट्रवाद: राजनीतिक और आर्थिक आयाम 

इस मध्यम वर्ग के लिए ‘उदारवाद’(Liberalism) का अर्थ था व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समानता | आर्थिक रूप से वे चाहते थे कि  व्यापार पर लगे सरकारी प्रतिबंध हटें | इसी मांग के चलते 1834 में प्रशा की पहल पर ‘ज़ॉलवेराइन’ (Zollverein) नामक एक सीमा शुल्क संघ बनाया गया, जिसने 30 से अधिक मुद्राओं को घटाकर केवल 2 कर दिया और आर्थिक बाधाओं को खत्म किया |

आर्थिक कारकप्रभाव
शुल्क अवरोधों का अंतव्यापार में सुगमता और गतिशीलता
रेलवे का विस्तारराष्ट्रीय एकीकरण और संचार में सुधार
मुद्राओं का मानकीकरणआर्थिक रूप से एकीकृत क्षेत्र का निर्माण

रुथीवाद की वापसी और 1815 की वियना काँग्रेस 

1815 में नेपोलियन की हार के बाद यूरोपीय शक्तियाँ-ब्रिटेन,रूस ,प्रशा और आस्ट्रिया-वियना में मिली | इनका   मकसद था “पुरानी यादों को ताज़ा करना, “यानि नेपोलियन द्वारा लाए गए बदलावों को खत्म करना और रूढ़िवादी व्यवस्था को फिर से स्थापित करना | उन्होंने सीमाओ पर नए राज्य बनाए ताकि फ्रांस विस्तार न कर सके |

क्रांतिकारियों का भूमिगत संघर्ष:मेज़ीनी का योगदान 

दमन के इस दौर मे राष्ट्रवाद की मशाल “यूरोप मेज़ीनी” जैसे क्रांतिकारियों ने थामी | मेज़ीनी का मानना था कि “ईश्वर ने राष्ट्रों को मानवता की स्वभामिक इकाई बनाया है” | उसने ‘यंग यूरोप’ जैसी गुप्त सिमितियां बनाई |ऑस्ट्रियाई चांसलर मेटरनिख ने मेजिनी को “सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक दुश्मन” करार दिया था । 

Nationalism in Europe

एकीकरण की महागाथा : जर्मनी और इटली का उदय 

19वी सदी का उत्तरार्ध यूरोप के लिए एकीकरण का काल था | जर्मनी और इटली जैसे भौगोलिक  अभिव्यक्तियां अब शक्तिशाली  राष्ट्र-राज्य बनने की ओर अग्रसर थीं |

विस्मार्क की ‘रक्त और लौह की नीति: जर्मनी का एकीकरण 

जर्मनी का एकीकरण उदारवादियों के हाथ मे नहीं बल्कि प्रशा के चांसलर ऑटो वॉन विस्मार्क के हाथ में आया | बिस्मार्क ने “जिसकी लाठी उसकी भैस” वाली नीति नहीं बल्कि ‘रक्त और लौह’(Blood and Iron) की कूटनीति अपनाई | उसने सात वर्षों मे तीन युद्ध लड़े और अंततः 1871 में वर्साय के महल में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मन सम्राट घोषित किया गया 

इटली क रिसोरजिमेंटों: कावूर,गैरीबाल्डी और मेज़ीनी 

इटली का एकीकरण एक त्रिकोणिय प्रेम कहानी’ जैसा था- मेज़ीनी ने विचार दिए, कावूर ने अपनी चतुर कूटनीती से फ्रांस के साथ गठबंधन किया, और गैरीबाल्डी ने अपने ‘रेड शर्ट’ सैनिकों के साथ दक्षिणी इटली को जीता | अंततः 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय एकीकृत इटली का राजा बना 

मुख्य व्यक्तित्वभूमिकामुख्य उपलब्धि
ऑटो वॉन बिस्मार्कप्रशा का चांसलरजर्मनी का एकीकरण (1871)
ग्यूसेप मेजिनीविचारक/क्रांतिकारी‘यंग इटली’ की स्थापना
काउंट कावूरकूटनीतिज्ञऑस्ट्रिया को हराने के लिए फ्रांस से संधि
ग्यूसेप गैरीबाल्डीसैनिक नेता‘हजारों का अभियान’ (Red Shirts)

साम्राज्यवाद और राष्ट्रवाद का घातक मेल 

19वी सदी के अंत तक राष्ट्रवाद का आदर्शवादी स्वरूप बदलने लगा था | अब “अपने देश से प्यार” के बजाय “दूसरे देश से नफरत” में बदलने लगा था | 

बाल्कन संकट: प्रथम विश्व युद्ध की दहलीज 

बाल्कन क्षेत्र जातीय और भौगोलिक विविधताओ का केंद्र था, जो ऑटोमन साम्राज्य के पतन के बाद “बारूद के ढेर” पर बैठा था । यहाँ के छोटे-छोटे राष्ट्र अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे, और बड़े यूरोपीय देश (रूस,जर्मनी,आस्ट्रिया-हंगरी ) अपनी ताकत दिखाने के लिए इसमे कूद पड़े | यही वह चिंगारी थी जिसने 1914 मे प्रथम विश्व युद्ध की आग सुलगाई |

20वी सदी का अंधकार: फासीवाद और नाजीवाद का उदय 

युद्ध के बाद की निराशा ने राष्ट्रवाद को एक नया और खौफनाक मोड़ दिया | इटली मुसोलिनी और जर्मनी में हिटलर ने उग्र राष्ट्रवाद को अपनी शक्ति का हथियार बनाया | उन्होंने “एक राष्ट्र, एक नेता” का नारा दिया और लोकतंत्र को जड़ से उखाड़ फेंका | हिटलर की नाजी विचारधारा ने नस्लीय श्रेष्ठता और यहूदियों के प्रति घृणा को राष्ट्रवाद का हिस्सा बना दिया, जो अंततः द्वितीय विश्व युद्ध और होलोकॉस्ट का कारण बना ।

आधुनिक यूरोप (2024-2025):राष्ट्रवाद का नया उभार 

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप संघ (EU) के रूप में एकीकरण की कोशिश की, ताकि राष्ट्रवाद की आग फिर से न भड़के | लेकिन 2024 और 2025 के आकडे बताते हैं की राष्ट्रवाद एक बार फिर से यूरोप की मुख्यधारा की राजनीति में वापस आ गया है |

यूरोपीय संघ के समक्ष चुनौतियाँ: ब्रेक्सिट से परे 

ब्रेक्सिट ने साबित कर दिया कि “बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद” की तर्ज पर ब्रिटिश जनता को लगा कि ब्रुसेल्स (EU) की नौकरशाही उनके हितों को नहीं समझ रही | आज कई देशों मे यह भावना प्रबल हो रही है की यूरोपीय एकीकरण ने उनकी राष्ट्रीय संप्रभुता को ‘खोखला’ (Hollowed Out) कर दिया हैं |

फ्रांस, जर्मनी और आस्ट्रिया मे दक्षिणपंथी लहर

2024 के संसदीय चुनावों में फ्रांस की ‘नेशनल रैली’(RN) ने 31.5% वोट हासिल किए | जर्मनी में ‘आल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’(AfD) का ग्राफ 11% से बढ़कर 24% तक पहुँच गया है | लोग थकान (Ukraine war), आर्थिक तनाव और अनियंत्रित प्रवासन से परेशान हैं |

Nationalism in Europe
देशराष्ट्रवादी पार्टीमुख्य मुद्देवर्तमान स्थिति (2025)
फ्रांसनेशनल रैली (RN)प्रवासन, स्थानीय अर्थव्यवस्थासंसद में भारी बढ़त
जर्मनीAfDऊर्जा संकट, प्रवासनमुख्य विपक्षी ताकत
ब्रिटेनरिफॉर्म पार्टीजीवन यापन की लागतजनमत सर्वेक्षणों में 35% समर्थन
ऑस्ट्रियाफ्रीडम पार्टी (FPÖ)यूक्रेन युद्ध का विरोधचुनाव में प्रथम स्थान

क्षेत्रवीय अलगाववाद: स्कॉटलैंड और कैटेलोनिया 

राष्ट्रवाद केवल देशों के बीच नहीं, बल्कि देशों के भीतर भी सक्रिय हैं | स्कॉटलैंड (UK) अरु कैटेलोनिया (Spain) के स्वतंत्रता आंदोलन इसी ‘सिविक ‘नैशनलिज़्म’ का उदाहरण हैं | ये क्षेत्र अपनी अलग सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के आधार पर पूर्ण स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं | 2008 के आर्थिक संकट ने इन भावनाओ को और हवा दी है |

निष्कर्ष: क्या राष्ट्रवाद फिर से यूरोप को बदलेगा?

दोस्तों, राष्ट्रवाद एक ऐसी तलवार है जिसकी “दो धार “ होती है | इसने पोलैंड, ग्रीस और हंगरी जैसे देशों को आजादी दिलाई, तो इसी ने दो विश्व युद्धों की तबाही भी दिखाई| 2025 में हम जो देख रहे हैं, वह “नया राष्ट्रवाद” है जो वैश्वीकरण (Globalization) के खिलाफ एक सुरक्षा कवच की तरह उभर रहा है| 

भविष्य मे चुनौती यह होगी की क्या यूरोप अपने गौरव को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ जोड़ पाएगा, या फिर इतिहास के वे पुराने घाव एक बार फिर हरे हो जाएंग? जैसा कि कहा जाता हैं, “अन्त भला तो सब भला,” लेकिन राष्ट्रवाद की इसी कहानी का अंत अभी कोसों दूर हैं |

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बिस्मार्क ने ‘रक्त और लौह’ (Blood and Iron) की नीति अपनाई, जिसका अर्थ था सैन्य शक्ति और कूटनीति के माध्यम से एकता स्थापित करना|

ज़ॉलवेराइन 1834 में बनाया गया एक जर्मन शुल्क संघ था। इसने आर्थिक बाधाओं को खत्म कर जर्मन राज्यों के बीच एकता की भावना पैदा की|

इसके मुख्य कारण प्रवासन (Migrant Crisis), यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई और सरकारों द्वारा घरेलू मुद्दों के बजाय अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को प्राथमिकता देना है|

मेजिनी ने युवाओं को प्रेरित करने और इटली के एकीकरण के लिए ‘यंग इटली’ (Young Italy) और ‘यंग यूरोप’ (Young Europe) जैसी गुप्त संस्थाएँ बनाई थीं|

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