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भारत मे ब्रिटिश शासन

British rule in India

क्या अपने कभी सोचा है कि एक व्यापारिक कंपनी कैसे एक विशाल और समृद्ध उपमहद्विप की नियति की मालकिन बन गई? भारत में ब्रिटिश शासन इतिहास एक ऐसा अध्याय है जिसने न केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं को बदला,बल्कि इसकी आत्मा, अर्थव्यवस्था और समाज को भी गहरे स्तर पर प्रभावित किया |

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प्रस्तावना 

भारत की इतिहास हमेशा से ही आक्रमणों,संघर्षों  और सांस्कृतिक मिलन का गवाह रहा है | लेकिन ब्रिटिश काल कुछ अलग था | यह केवल एक सैन्य विजय नहीं थी; यह एक व्यवस्थित आर्थिक और राजनीतिक नियंत्रण था जो सदियों तक चला | इस लेख मे, हम एक लंबी यात्रा पर निकलेंगे – मसालों के व्यापार से लेकर पूर्ण साम्राज्यवादी नियंत्रण तक, और फिर आजादी के उस सुनहरे सवेरे तक | हम सरल शब्दों में समझेंगे की कैसे अंग्रेजों ने भारत पर राज किया, उनकी नीतिया क्या थी, और उन्होंने हमारे देश को कैसे हमेशा के लिए बदल दिया |

व्यापार से सत्ता तक का सफर 

अंग्रेजों का भारत आना एक सोची-समझी साम्राज्यवादी योजना नहीं थी, बल्कि यह मुनाफे की भूख थी |

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन

साल 1600 में महारानी एलीजबेथ प्रथम से एक चार्टर प्राप्त करके ब्रिटिश ईस्ट इंडिया का कंपनी की स्थापना हुई | शुरुआत में उनका लक्ष्य केवल व्यापार था- मसाले,सूती कपड़ा,और रेशम | उन्होंने सूरत मे अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की और धीरे-धीरे पूरे तट पर अपना जाल बिछा लिया| क्या आप जानते हैं? उस समय भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक था | अंग्रेजों के लिए यह एक ‘सोने की चिड़िया’ थी जिसे वे खोजना चाहते थे |

पलासी और बक्सर का युद्ध 

व्यापार करते-करते अंग्रेजों को समझ आ गया की भारतीय राज्य आपस में लड़ते रहते हैं | उन्होंने इसी का फायदा उठाया | सत्ता की ओर उनका पहला बड़ा  कदम था 1757 का प्लासी का युद्ध | रॉबर्ट  रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर को रिश्वत देकर बंगाल के नवाब सिराज-उद-दौला को हरा दिया।

इसके बाद 1764 में बक्सर का युद्ध हुआ | इस जीत ने अंग्रेजों को बंगाल बिहार और उड़ीसा की “दीवानी” (राजस्व वसूलने का अधिकार ) दिला दी | यही से भारत की नियति अंग्रेजों के हाथों में चली गई | अब वे सिर्फ व्यापारी नहीं रहे, वे शासक बन गए थे |

British rule in India

ब्रिटिश शासन की नीतियां और आर्थिक प्रभाव 

अंग्रेजों ने भारत पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कई रणनीतिया अपनाई | उनका मुख्य उदेश्य भारत की कीमत पर ब्रिटेन को समृद्ध बनाना था | निचे दिए गए चार्ट के माध्यम से आप इस आर्थिक शोषण के प्रभाव को देख सकते हैं |

आर्थिक शोषण 

भारत जो कभी दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक था, उसे अंग्रेजों ने कच्चे माल का निर्यातक और ब्रिटेन में बने तैयार का आयातक बना दिया | इसे ही ‘धन की निकासी’ (Drain of wealth) का सिद्धांत कहा गया, जिसे दादाभाई नौरोजी ने दुनिया के सामने रखा |

British rule in India

फुट डालो और राज करो

मुट्ठी भर अंग्रेज इतने बड़े देश पर राज कैसे कर रहे थे? उनका बड़ा हथियार था ‘फुट डालो और राज करो’| उन्होंने हिन्दू और मुसलमानो के बीच अविश्वास के बीज बोए | 1905 मे बंगाल का विभाजन इसका सबसे बड़ा उदाहरण था | उन्होंने रियासतों के राजाओ को भी एक-दूसरे के खिलाफ भड़काया ताकि वे कभी एकजुट होकर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती न दे सकें |

1857 की क्रांति: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

अंग्रेजों के अत्याचार,भारी कर, और धार्मिक भावनाओ को ठेस पहुंचाने वाली नीतियों (जैसे चर्बी वाले कारतूस ) ने एक बड़े विद्रोह को जन्म दिया |

विद्रोह की चिंगारी

मंगल पांडे की शहादत से शुरू हुई यह क्रांति जल्द ही पूरे उत्तर और मध्य भारत में फैल गई | रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, वीर कुवर सिंह, और बेगम हज़रत महल जैसे शूरवीरों ने अंग्रेजों की निव हिला दी |

ब्रिटिश ताज का सीधा शासन 

भले ही 1857 की क्रांति सैन्य रूप से विफल रही, लेकिन प्रभाव बहुत गहरा था | इसके परिणामस्वरूप, ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी को खत्म कर दिया 1858 के अधिनियम के तहत भारत का नियंत्रण सीधे ब्रिटिश ताज (British Crown) के हाथों मे आ गया | भारत के गवर्नर-जनरल को अब ‘वायसराय’ कहा जाने लगा |

भारतीय समाज पर प्रभाव 

ब्रिटिश राज ने न केवल हमारी अर्थव्यवस्था लूटी, बलकि हमारे समाज की संरचना को भी बदल दिया | कुछ बदलाव शोषक थे, तो कुछ के अनजाने में सकारात्मक परिणाम भी निकले |

शिक्षा प्रणाली 

मौकोले की शिक्षा नीति

लॉर्ड मैकाले ने भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत की | उनका उद्देश्य भारतीयों को शिक्षित करना नहीं था, बल्कि अंग्रेजों के लिए काम करने वाले सस्ते क्लर्क तैयार करना था | उन्होंने कहा था वे  रंग और रक्त से भारतीय चाहते हैं लेकिन स्वाद, विचारों और बुद्धि में अंग्रेज | हालांकि, अंग्रेजी भाषा ने अनजाने में ही भारतीयों को पश्चिमी दुनिया के लोकतंत्र,समानता और स्वतंत्रता के विचारों से अवगत करा दिया |

रेलवे और बुनियादी ढाँचा  

अंग्रेज ने भारत में रेलवे, पोस्ट और टेलीग्राफ की शुरुआत की | उनका मकसद सेना को जल्दी एक जगह से दूसरी जगह भेजना और कच्चा माल बंदरगाह तक पहुचाना था | लेकिन इसने अनजाने मे पूरे भारत को एक सूत्र में बांधने का काम किया |

स्वतंत्रता संग्राम का उदय 

जैसे-जैसे शिक्षा का प्रसार हुआ और शोषण की हकीकत सामने आई, भारतीय सामने आई, भारतीयों में राष्ट्रवाद की भावना जागने लगी |

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 

1885 मे ए. ओ. ह्यूम द्वारा भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस (INC) की स्थापना हुई | शुरुआत, मे इसका उद्देश्य अंग्रेजों के सामने भारतीयों की मांगे रखना था, लेकिन धीरे-धीरे यह पूर्ण स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाला सबसे बड़ा मंच बन गया बाल गंगाधर तिलक जैसे नेताओ ने नारा दिया: “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा!”

महात्मा गांधी और प्रमुख आंदोलन

1915 में महात्मा गांधी के भारत लौटने के बाद स्वतंत्रता संग्राम ने जन-आंदोलन का रूप ले लिया | उन्होंने ‘सतयग्रह’ और ‘अहिंसा’ को अपना मुख्य हथियार बनाया |

असहयोग आंदोलन (1920)

जलियावाला बाग हत्याकांड और रॉलेट एक्ट के विरोध में गांधीजी ने लोगों से ब्रिटिश सचूलों, अदालतों और विदेशी कपड़ों का वाहिष्कार करने का आवाहन किया इसने अंग्रेजों की आर्थिक रीढ़ पर गहरी चोट की |

सविनय अवज्ञा आंदोलन(1930)

इसकी शुरुआत एतिहासिक ‘दांडी मार्च’ से हुई, जहां गांधीजी ने नमक कानून तोड़ा | इस आंदोलन ने दुनिया भर का ध्यान भारत के संघर्ष की ओर खींचा महिलाओं ने इसमे बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया |

भारत छोड़ो आंदोलन 

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गांधीजी ने “करो या मरो “ का नारा दिया | यह एक स्वतः स्फूर्त आंदोलन था जिसने ब्रिटिश शासन को स्पष्ट संदेश दे दिया | की अब उनके दिन गिने-चुने है | सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फौज ने भी विदेश से इस लड़ाई को तेज़ किया |

ब्रिटिश राज का अंत और निष्कर्ष 

स्वतंत्रता की प्राप्ति 

लगातार आंदोलनो, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की कमजोर आर्थिक स्थिति और भारतीय नौसेना के विद्रोह (1946) ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया | अंततः, 15 अगस्त 1947 को भारत ने आजादी की सांस ली | हालंकी यह खुशी विभाजन के गहरे दर्द (भारत और पाकिस्तान ) के साथ आई थी |

British rule in India

निष्कर्ष

 भारत मे ब्रिटिश शासन एक जटिल कालखंड था | लगभग 200 वर्षों की गुलामी ने भारत के भयंकर गरीबी में धकेल दिया | जो देश 18वी सदी की शुरुआत मे विश्व  अर्थव्यवस्था का लगभग 25% हिस्सा था, वह 1947 तक 3% से भी कम रह गया | लेकिन इसी संघर्ष ने भारत को एक आधुनिक राष्ट्र भी बनाया | आज का लोकतांत्रिक ढाँचा रेलवे, आधुनिक शिक्षा, और सबसे महत्वपूर्ण -विविधता में एकता की हमारी भावना – उसी एतिहासिक संघर्ष से निखर कर सामने आई है | ब्रिटिश राज का इतिहास हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता अनमोल है और इसे सहेज कर रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है |

प्लासी का युद्ध भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की नींव माना जाता है। इस जीत के बाद अंग्रेजों ने बंगाल के खजाने पर कब्जा कर लिया, जिससे उन्हें अपनी सेना बढ़ाने और पूरे भारत पर नियंत्रण करने की आर्थिक ताकत मिली।

यह सिद्धांत दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक ‘पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया’ में दिया था। उन्होंने बताया कि कैसे अंग्रेज भारत का धन लूटकर ब्रिटेन ले जा रहे हैं, जिससे भारत लगातार गरीब हो रहा है।

इसके कई कारण थे: डलहौजी की ‘हड़प नीति’ (Doctrine of Lapse), किसानों पर भारी कर, भारतीय सैनिकों से भेदभाव, और तात्कालिक कारण था ‘चर्बी वाले कारतूस’ का प्रयोग, जिसने हिंदू और मुस्लिम दोनों सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।

1942 के इस आंदोलन ने साबित कर दिया कि भारतीय अब किसी भी कीमत पर ब्रिटिश शासन बर्दाश्त नहीं करेंगे। यद्यपि इसे बलपूर्वक दबा दिया गया, लेकिन इसने अंग्रेजों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि भारत पर अब शासन करना असंभव है।




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